खुली मिठाइयों और बेकरी उत्पादों की ट्रे पर निर्माण व अवसान तिथि लिखना अनिवार्य, खाद्य सुरक्षा आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने जारी किए आदेश
देहरादून। उत्तराखंड में मिठाई की दुकानों पर खुली मिठाइयां बेचने वाले कारोबारियों को अब उनकी निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट भी प्रदर्शित करनी होगी। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला लिया है। नए आदेश के अनुसार, 26 अक्टूबर 2026 से राज्यभर में बिक्री के लिए रखी जाने वाली खुली मिठाइयों और बेकरी उत्पादों के काउंटर या ट्रे पर निर्माण तिथि के साथ अवसान तिथि यानी एक्सपायरी डेट अथवा यूज बाई डेट स्पष्ट रूप से लिखना अनिवार्य होगा। खाद्य सुरक्षा आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।
मिठाई खरीदने से पहले जान सकेंगे उसकी ताजगी
अब तक पैकेट में बिकने वाली मिठाइयों पर निर्माण तिथि और उपयोग अवधि से जुड़ी जानकारी देना अनिवार्य था, लेकिन खुली मिठाइयों और बेकरी उत्पादों के मामले में ऐसी स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। इसके चलते ग्राहकों को अक्सर यह पता नहीं चल पाता था कि मिठाई कब बनाई गई है और उसे कितने समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है। विभागीय निरीक्षण और प्रवर्तन कार्रवाई के दौरान भी यह समस्या सामने आई थी। नए नियम से उपभोक्ताओं को मिठाइयों की ताजगी और उनकी उपयोग अवधि की जानकारी मिल सकेगी।
उत्पाद के अनुसार अलग-अलग होगी उपयोग अवधि
खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अनुसार, मिठाइयों और बेकरी उत्पादों की उपयोग अवधि उनकी प्रकृति के आधार पर अलग-अलग होती है। कुछ मिठाइयां केवल एक दिन तक उपयोग योग्य रहती हैं, जबकि कुछ उत्पादों की उपयोग अवधि 30 दिन तक हो सकती है। ऐसे में निर्माण तिथि और उपयोग की अंतिम तिथि प्रदर्शित होने से ग्राहकों को उत्पाद खरीदते समय सही जानकारी मिल सकेगी।
पूरे उत्तराखंड में लागू होगी व्यवस्था
नए आदेश के तहत मिठाई विक्रेताओं और बेकरी कारोबारियों को अपने प्रतिष्ठानों में बिक्री के लिए रखे खुले उत्पादों के काउंटर या ट्रे पर निर्धारित जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी। यह व्यवस्था पूरे उत्तराखंड में लागू होगी। खाद्य सुरक्षा विभाग के इस कदम का उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को बेहतर बनाना तथा उपभोक्ताओं को जागरूक करना है। इससे ग्राहकों को मिठाई खरीदते समय उसकी ताजगी और उपयोग अवधि के बारे में जानकारी मिलेगी और खाद्य कारोबार में पारदर्शिता बढ़ेगी।


