देहरादून: उत्तराखंड शासन ने प्रदेश के 42 राजकीय विद्यालयों के उच्चीकरण को मंजूरी दे दी है। इनमें सात राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों को हाईस्कूल और 35 राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को इंटरमीडिएट स्तर पर उच्चीकृत किया जाएगा। शासन ने इन विद्यालयों के संचालन के लिए कुल 448 अस्थायी पद सृजित करने की भी स्वीकृति दी है।
सात विद्यालय बनेंगे हाईस्कूल
शासनादेश के अनुसार, सात राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों को हाईस्कूल स्तर पर उच्चीकृत किया जाएगा। इनमें ऊधमसिंह नगर के पत्थरचट्टा और धीमरी ब्लॉक, उत्तरकाशी के लिवाड़ी, बागेश्वर के भगरतोला, वाछम और धन्यारी तथा चंपावत के धासम स्थित विद्यालय शामिल हैं।
इन विद्यालयों के लिए कुल 63 अस्थायी पद स्वीकृत किए गए हैं। प्रत्येक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के साथ विषयवार सहायक अध्यापकों के पद होंगे।

35 विद्यालय होंगे इंटरमीडिएट
प्रदेश के 35 राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को इंटरमीडिएट स्तर पर उच्चीकृत किया गया है। इनमें ऊधमसिंह नगर, टिहरी, उत्तरकाशी, चंपावत, पौड़ी, नैनीताल, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और देहरादून जिले के विद्यालय शामिल हैं।
इन विद्यालयों में विद्यार्थियों को 12वीं तक की शिक्षा उपलब्ध होने से स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा की तैयारी के लिए बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।
इंटर स्तर के विद्यालयों में 385 पद
35 विद्यालयों के लिए कुल 385 अस्थायी पद स्वीकृत किए गए हैं। प्रत्येक विद्यालय में एक प्रधानाचार्य और 10 प्रवक्ताओं के पद शामिल हैं। हाईस्कूल स्तर के विद्यालयों में प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक के पद स्वीकृत किए गए हैं।
28 फरवरी 2027 तक प्रभावी रहेंगे पद
शासनादेश के मुताबिक सृजित किए गए अस्थायी पद आदेश जारी होने या नियुक्ति की तारीख, जो भी बाद में हो, से 28 फरवरी 2027 तक प्रभावी रहेंगे। जरूरत पड़ने पर शासन इन पदों को निर्धारित अवधि से पहले समाप्त भी कर सकता है।
पहले से कार्यरत शिक्षकों के समायोजन की व्यवस्था
उच्चीकृत जूनियर हाईस्कूलों में पहले से सृजित पद समर्पित माने जाएंगे। वहां कार्यरत प्रधानाध्यापक और शिक्षकों को शासनादेश जारी होने के तीन माह के भीतर अन्य विद्यालयों में समायोजित किया जाएगा। इसी तरह हाईस्कूल से इंटर स्तर पर उच्चीकृत विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाध्यापकों का भी नियमानुसार समायोजन किया जाएगा।
सरकार के इस फैसले से पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने आसपास ही हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर की शिक्षा उपलब्ध होने की उम्मीद है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने और विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई के लिए दूर जाने की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है।


