पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया ऐतिहासिक पर्व, देवता के आगमन पर जयकारों से गूंजा बरसाली
उत्तरकाशी। विकासखंड डुंडा के पौराणिक गांव बरसाली में नाग पंचमी का पर्व इस वर्ष भी श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। गांव के आराध्य देव भगवान नागराजा महाराज के अपनी थात में पहुंचते ही पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। देवता के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु जुटे। इस दौरान फूलों की वर्षा के बीच श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए, जिससे पूरा वातावरण गूंज उठा।
नागराजा महाराज के आगमन पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने परिवार और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। पारंपरिक वाद्य यंत्रों और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।
दूध-दही और मक्खन की होली रही खास आकर्षण
बरसाली की नाग पंचमी की सबसे अनूठी परंपरा दूध, दही और मक्खन की होली इस बार भी आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही। नागराजा महाराज के स्वागत के बाद श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे पर दूध, दही और मक्खन की जमकर बरसात की। इसके बाद श्रद्धालु इस पारंपरिक होली में उत्साह के साथ झूमते नजर आए।
लोक संस्कृति और परंपराओं का जीवंत स्वरूप
बरसाली में आयोजित नाग पंचमी केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की सदियों पुरानी लोक संस्कृति और परंपराओं को भी जीवंत बनाए हुए है। हर वर्ष ग्रामीण पारंपरिक विधि-विधान से अपने आराध्य देव की पूजा करते हैं और इस पर्व को सामूहिक उत्सव के रूप में मनाते हैं।
आयोजन में ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी ने बरसाली की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की। नाग पंचमी के अवसर पर गांव में दिनभर उत्सव जैसा माहौल बना रहा।


