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‘रोजगार बचाओ, बेलनी पुल बचाओ’ के लगाए नारे, 33.05 करोड़ की परियोजना पर उठाए सवाल
रुद्रप्रयाग। राष्ट्रीय राजमार्ग-107 पर बेलनी में करीब छह दशक पुराने स्टील पुल के स्थान पर प्रस्तावित नए मोटर सेतु के निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध तेज हो गया है। व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने प्रदर्शन कर प्रस्तावित पुल निर्माण को रोकने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने ‘बेलनी पुल कैंसल करो’, ‘रोजगार बचाओ, बेलनी पुल बचाओ’ और ‘जनता के हित में फैसला लो’ जैसे नारे लगाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान बेलनी पुल अभी भी उपयोग में है और इसके स्थान पर नया पुल बनाने से पहले इसके औचित्य और स्थानीय स्तर पर पड़ने वाले प्रभाव का गंभीरता से आकलन किया जाना चाहिए। लोगों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित निर्माण से वर्षों से पुल के आसपास कारोबार कर रहे दुकानदारों और मकान मालिकों की आजीविका प्रभावित होगी।
28 दुकानदारों के रोजगार पर संकट का दावा
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक नए पुल के निर्माण से करीब 28 दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो सकता है। वहीं करीब 10 मकान मालिकों की आजीविका पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है। व्यापारियों का कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसी परियोजना का विरोध करेंगे जिससे स्थानीय लोगों का रोजगार खत्म होने का खतरा पैदा हो।
स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि अलकनंदा नदी पर बेलनी पुल से करीब 200 मीटर के दायरे में अन्य कनेक्टिविटी परियोजनाएं भी प्रस्तावित हैं। ऐसे में पुराने पुल को हटाकर उसी क्षेत्र में नया पुल बनाने की आवश्यकता को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
33.05 करोड़ की लागत से प्रस्तावित है नया पुल
जानकारी के अनुसार वार्षिक योजना 2025-26 के तहत एनएच-107 के किमी 1.00 बेलनी में पुराने स्टील सेतु के स्थान पर एप्रोच सहित 85.68 मीटर लंबे नए मोटर सेतु का निर्माण प्रस्तावित है। नया पुल वर्तमान पुल के अपस्ट्रीम साइड में बनाया जाना है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है और इसकी अनुमानित लागत करीब 33.05 करोड़ रुपये है।
स्थानीय हितों को ध्यान में रखने की मांग
बेलनी सभासद सुरेंद्र रावत ने कहा कि नए पुल से चारधाम यात्रा और यातायात व्यवस्था को बेहतर करने में मदद मिल सकती है, लेकिन पुराने पुल को हटाकर नया निर्माण करने के प्रस्ताव पर स्थानीय लोगों की आपत्तियों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पुल निर्माण से पहले रोजगार और संपत्तियों पर पड़ने वाले प्रभाव का सर्वे कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर जिलाधिकारी कार्यालय में धरना-प्रदर्शन करने की भी बात कही गई।
मंत्री की अध्यक्षता में हो चुकी है बैठक
वहीं, नए बेलनी सेतु को लेकर मंगलवार को जिला कार्यालय सभागार में कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी की अध्यक्षता में बैठक भी हुई थी। बैठक में अधिकारियों ने परियोजना की स्वीकृति और निर्माण संबंधी जानकारी दी। मंत्री ने चारधाम यात्रा और क्षेत्र की बढ़ती यातायात जरूरतों को देखते हुए नए पुल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा था कि इससे यातायात व्यवस्था सुगम होने के साथ क्षेत्र की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।
अब एक ओर प्रशासन और सरकार नए पुल को क्षेत्र की यातायात जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण बता रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय व्यापारी और नागरिक रोजगार एवं आजीविका प्रभावित होने की आशंका को लेकर विरोध में उतर आए हैं। ऐसे में परियोजना को लेकर प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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