खराब मौसम के चलते रेस्क्यू में चुनौती, मौसम साफ होते ही हेलीकॉप्टर से होगी हवाई रेकी
उत्तरकाशी: उत्तरकाशी के उच्च हिमालयी क्षेत्र में लगातार बारिश और बर्फबारी के बीच कालिंदी ट्रैक पर 18 ट्रैकरों के फंसे होने की सूचना से प्रशासन अलर्ट हो गया है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि सभी ट्रैकर बेस कैंप में सुरक्षित हैं और प्रशासन का उनसे लगातार संपर्क बना हुआ है। मौसम अनुकूल होते ही हवाई रेकी कर रेस्क्यू अभियान शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

36 घंटे से निचले क्षेत्रों में बारिश, ऊंचाई पर बर्फबारी
सितंबर के अंतिम सप्ताह में जिले के मौसम में अचानक बदलाव आया है। करीब 36 घंटे से निचले क्षेत्रों में बारिश, जबकि उच्च हिमालयी इलाकों में लगातार बर्फबारी हो रही है। इसी दौरान कालिंदी ट्रैक पर 18 ट्रैकरों के फंसे होने की सूचना मिली। प्रशासन ने उनकी स्थिति की निगरानी शुरू कर दी है।
वन विभाग ने शनिवार को सैटेलाइट फोन के माध्यम से ट्रैकरों को मौसम संबंधी अलर्ट की जानकारी दी थी। रविवार देर शाम जिलाधिकारी ने स्मार्ट कंट्रोल रूम में अधिकारियों के साथ बैठक कर रेस्क्यू की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
आईटीबीपी, निम, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की संयुक्त टीम तैयार
ट्रैकरों को सुरक्षित निकालने के लिए आईटीबीपी, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम), एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, वन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग की संयुक्त रेस्क्यू टीम तैयार की गई है। मौसम अनुकूल रहने पर टीम को कालिंदी ट्रैक की ओर रवाना किया जाएगा। इसके साथ ही मौसम साफ होने पर हेलीकॉप्टर से हवाई रेकी कर रेस्क्यू के लिए सुरक्षित मार्ग तलाशा जाएगा।
5,950 मीटर की ऊंचाई पर है कालिंदी ट्रैक
करीब 5,950 मीटर (लगभग 19,500 फीट) की ऊंचाई पर स्थित कालिंदी ट्रैक बेहद कठिन ग्लेशियर मार्ग माना जाता है। अचानक बर्फबारी, तेज हवाएं, कम दृश्यता और कम ऑक्सीजन के कारण यहां रेस्क्यू अभियान चुनौतीपूर्ण रहता है। सामान्य मौसम में भी ट्रैक से नीचे आने में तीन से चार दिन तक का समय लग सकता है।
प्रशासन ने मौसम अनुकूल होने तक ट्रैकरों को बेस कैंप में ही सुरक्षित रहने की सलाह दी है।
ऊंचाई वाले ट्रैक पर ट्रैकिंग गतिविधियों पर रोक
खराब मौसम को देखते हुए जिला प्रशासन ने गंगोत्री क्षेत्र समेत ऊंचाई वाले ट्रैक पर ट्रैकिंग गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगा रखी है। ट्रैकिंग एजेंसियों को नए दलों को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में नहीं भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता सभी 18 ट्रैकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मौसम साफ होने के बाद हवाई रेकी और जमीनी रेस्क्यू अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा।


